वर्चस्व
यह कहानी मेरे परनाना की है जो मुझे मेरे मामाजी ने सुनाई थी। मेरे परनाना किसी मलहट्टे (मवेशी हाट) से दो बैल ले आए। दोनों बैल भले बहुत ऊंचे कद के नहीं थे लेकिन बिल्कुल छरहरे और गठीले थे। परनाना उन्हें लेकर सुबह सुबह खेत जोतने निकल जाते थे और सीधे तीसरे पहर लौटते। बाकी किसानों के बैल जितने समय में दो कट्ठा जोतते, उतने समय में ये दो बैल चार कट्ठा बिना कोई ऊंह आह किए जोत लेते। परनाना को दोनों बैलों पर बहुत गर्व था।
हमारा गांव यादवों का था। बगल का गांव चौधरियों का था। उनमें से एक थे तेजू चौधरी। बहुत बड़े जमींदार थे। उनके नाम से आस पास के गांव में भी चौधरियों का वर्चस्व छाया हुआ था। तेजू चौधरी के लड़के की शादी हो रही थी। बारात करीब पंद्रह कोस दूर एक गांव जानेवाले थी। उन दिनों लोग बैलगाड़ियों से ही बारात जाते थे। बड़े आदमी की बारात थी। करीब पैंतीस चालीस बैलगाड़ियां जा रही थी। उनमें से एक बैलगाड़ी हमारे परनाना हाँक रहे थे, जिसे उनके ही पुत्ररत्न समान दो बैल खींच रहे थे।
बैलगाड़ियों की कतार में काफी पीछे थी हमारे परनाना की बैलगाड़ी। लेकिन एक बार जब बारात चलने लगी तो फिर जो हुआ सो अद्भुत था। परनाना के दोनों बैल पूरी मस्ती से झूमते हुए आगे बढ़ते गए और एक एक करके बाकी सारी बैलगाड़ियों को ओवरटेक करते गए। उन दिनों रास्ते ऊबड़ खाबड़ हुआ करते थे। कभी जंगल तो कभी खेत। कहीं कीचड़ तो कहीं बालू। लेकिन हमारे बैलों को रत्ती भर भी फरक नहीं पड़ा। रफ्तार बनाए रखी और सबसे पहले लड़की वालों के यहां धमक पहुंचे। बाकी बैलगाड़ियां करीब एक घंटे बाद पहुंची।
तीन चार दिन बाद की बात है। सुबह सुबह तेजू चौधरी परनाना से मिलने आए और एक अजीब सा प्रस्ताव उनके सामने रख दिया। तेजू चौधरी का कहना था कि उन्होंने ऐसे बैलों की जोड़ी पहले कभी नहीं देखी थी। इसलिए वो परनाना से वो दो बैल खरीदने आए थे। बदले में वो बीस बीघा जमीन देने को राजी थे। बड़े लोगों की यही बात होती है। जो चीज पसंद कर लें वो हासिल कर के रहते हैं। मेरे परनाना के पास उस समय मुश्किल से तीन बीघा जमीन होगी। लेकिन अभिमान की मात्रा उनमें भी किसी नवाब से कम न थी। तेजू चौधरी का प्रस्ताव सम्मान के साथ ठुकरा दिया। बाद में कुछ लोगों ने परनाना की इस तथाकथित मूर्खता की हंसी उड़ाई। इस पर परनाना का तर्क कुछ इस प्रकार था। मैं बीस बीघा जमीन लेकर भी चौधरियों की बराबरी में नहीं आऊंगा। लेकिन ये दो बैलों की जोड़ी एक ऐसा धन है जिसे देखकर तेजू चौधरी बस मचलता रहेगा, जलता रहेगा, बस इनकी आरजू कर सकेगा लेकिन कभी पा नहीं सकेगा। चौधरियों का वर्चस्व उनकी जमींदारी से था। मेरे परनाना का वर्चस्व उनके दो बैलों से था।
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