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Showing posts from December, 2025
वर्चस्व  यह कहानी मेरे परनाना की है जो मुझे मेरे मामाजी ने सुनाई थी। मेरे परनाना किसी मलहट्टे (मवेशी हाट) से दो बैल ले आए। दोनों बैल भले बहुत ऊंचे कद के नहीं थे लेकिन बिल्कुल छरहरे और गठीले थे। परनाना उन्हें लेकर सुबह सुबह खेत जोतने निकल जाते थे और सीधे तीसरे पहर लौटते। बाकी किसानों के बैल जितने समय में दो कट्ठा जोतते, उतने समय में ये दो बैल चार कट्ठा बिना कोई ऊंह आह किए जोत लेते। परनाना को दोनों बैलों पर बहुत गर्व था।            हमारा गांव यादवों का था। बगल का गांव चौधरियों का था। उनमें से एक थे तेजू चौधरी। बहुत बड़े जमींदार थे। उनके नाम से आस पास के गांव में भी चौधरियों का वर्चस्व छाया हुआ था। तेजू चौधरी के लड़के की शादी हो रही थी। बारात करीब पंद्रह कोस दूर एक गांव जानेवाले थी। उन दिनों लोग बैलगाड़ियों से ही बारात जाते थे। बड़े आदमी की बारात थी। करीब पैंतीस चालीस बैलगाड़ियां जा रही थी। उनमें से एक बैलगाड़ी हमारे परनाना हाँक रहे थे, जिसे उनके ही पुत्ररत्न समान दो बैल खींच रहे थे।      बैलगाड़ियों की कतार में काफी पीछे थी हमारे परनाना ...